पचपदरा झील

पचपदरा झील बाड़मेर जिले के पचपदरा के पास स्थित है। यह झील 25 वर्ग किमी. में फैली है। इस झील में खारवल जनजाति द्वारा मोरली झाड़ी की टहनियों से नमक बनाया जाता है। नमक का निर्माण राजस्थान सरकार साल्टस लि. (1960) के सहयोग से किया जाता है।

डीडवाना झील

4 किमी. लंबी एवं 10 वर्ग किमी. में फैली डीडवाना झील नागौर जिले में डीडवाना नगर के समीप स्थित है। यहां पर राजस्थान स्टेट केमिकल वर्क्स के तहत दो उद्योग स्थापित किए गए हैं, जो सोडियम सल्फाइड एवं सोडियम सल्फेट का निर्माण करते हैं। यहां का नमक अखाद्य है तथा इसका उत्पादन राजस्थान सरकार साल्टस … Read more

राजसमंद झील

राजसमंद झील झील का निर्माण 1662 ई. में महाराणा राजसिंह ने राजसमंद जिले में कांकरौली के समीप कराया था। गोमती नदी इस झील में मिलती है। झील के उत्तरी भाग को नौ चौकी कहा जाता है। यहां पर संगमरमर के 25 शिलालेखों पर मेवाड़ का इतिहास अंकित है। इस झील के तट पर विश्व प्रसिद्ध … Read more

नक्की झील

नक्की झील माउण्ट आबू में 1200 मी. की ऊंचाई पर स्थित है। यह एक कृत्रिम झील है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस झील का निर्माण देवताओं ने अपने नाखूनों से खोदकर किया है। इस झील के आसपास टॉक रॉक, ननराॅक एवं नंदी रॉक नामक महत्त्वपूर्ण चट्टानी आकृतियां बनी हैं। यह राजस्थान की सबसे ऊंची झील … Read more

फतेह सागर झील

फतेह सागर झील उदयपुर नगर के उत्तर पश्चिम में स्थित है। यह पिछोला झील के उत्तर में है। इसका निर्माण महाराणा जयसिंह ने देवाली तालाब के रूप में करवाया था। यह झीलपिछोला झील से लगभग आधा कि.मी. लम्बी नहर द्वारा मिली हुई है। यहां सौर वैद्यशाला, नेहरु उद्यान, मोती मगरी, राणा उदयसिंह के महल स्थित … Read more

पिछोला झील

पिछोला झील का निर्माण राणा लाखा के शासन काल में एक बनजारे ने 14वीं शताब्दी के अन्त में (1382-1418 ई.) करवाया था। इस झील के किनारों को महाराणा उदयसिंह ने ऊँचा कराया था। उदयपुर शहर के पश्चिम में पिछोली गाँव केकिनारे पर स्थित होने के कारण यह पिछोला के नाम से जानी जाती है। यह … Read more

कालीसिन्ध नदी

कालीसिन्ध नदी का उद्गम देवास (मध्य प्रदेश) के निकट बागली की पहाड़ियों से होता है।य ह नदी कोटा, झालावाड़ से बहती हुई नानेरा नामक स्थान पर चंबल नदी में मिल जाती है। इस नदी की प्रमुख सहायक नदियां-निवाज, परवन, उजाड़ एवं आहु आदि है।

काकनेय नदी

काकनेय नदी जैसलमेर के निकट कोटरी गांव की पहाड़ियोंसे निकलती है। इस नदी को मसूरदी या काकनी नदी भी कहा जाता है। यह अत: प्रवाही नदी है। कुछ दूर बहकर यह लुप्त हो जातीहै। वर्षा के दिनों में राजस्थान के उत्तरी-पश्चिमी भाग में बहने के बाद यह बुझ झील में गिर जाती है।

सोम नदी

सोम नदी का उद्गम उदयपुर के निकट बाबलवाड़ा के बीछामेड़ा की पहाड़ियों से होता है। यह नदी बेणेश्वर के निकट माही नदी में मिल जाती है। सोम नदी की प्रमुख सहायक नदियां-गोमती, जाखम एवं सारनी है।

बेड़च नदी

बेड़च नदी का उद्गम उदयपुर के उत्तर में गोगुन्दा की पहाड़ियों से होता है। इसे आहड़ नदी भी कहते हैं। उदयसागर के बाद इसे बेड़च कहा जाता है। भीलवाड़ा के निकट यह बनास नदी में मिल जाती है। बेड़च नदी की प्रमुख सहायक नदियां- वामन, गुजरी, गम्भीरी आदि हैं।