Category: पर्यावरण

  • सरिस्का वन्य जीव अभयारण्य

    यह अभयारण्य राजस्थान के अलवर जिले में स्थित है। यहां बाघ, जरख, सांभर, चीतल आदि वन्य जीव पाए जाते हैं।

    और पढ़ें…

  • सरिस्का वन्यजीव अभयारण्य

    यह अभयारण्य राजस्थान के अलवर जिले में स्थित है। यहां बाघ, जरख, सांभर, चीतल आदि वन्य जीव पाए जाते हैं।

    और पढ़ें…

  • सीतामाता वन्यजीव अभयारण्य

    यह अभयारण्य राजस्थान के प्रतापगढ़, चित्तौड़गढ़ एवं उदयपुर जिलों में स्थित है। यहां उड़न गिलहरी, सांभर, लोमड़ी आदि वन्य जीव पाए जाते हैं।

    और पढ़ें…

  • माउण्ट आबू वन्यजीव अभयारण्य

    यह अभयारण्य राजस्थान के सिरोही जिले में स्थित है। यहां रीछ, जंगली मुर्गा, चिंकारा, चीतल, सांभर आदि वन्य जीव पाए जाते हैं।

    और पढ़ें…

  • रामगढ़ विषधारी वन्य जीव अभयारण्य

    यह अभयारण्य राजस्थान के बूंदी जिले में स्थित है। यहां विषधारी सांप, बाघ, रीछ आदि वन्य जीव पाए जाते हैं

    और पढ़ें…

  • राष्ट्रीय चम्बल घड़ियाल वन्य जीव अभयारण्य

    यह अभयारण्य राजस्थान के कोटा, सवाईमाधोपुर, करौली एवं धौलपुर जिलों में स्थित है। यहां घड़ियाल, भेड़िया, सियार, लोमड़ी आदि वन्य जीव पाए जाते हैं।

    और पढ़ें…

  • जमवारामगढ़ वन्यजीव अभयारण्य

    यह अभयारण्य राजस्थान के जयपुर जिले में स्थित है। यहां बघेरा, जरख, सियार, भेड़िया आदि वन्य जीव पाए जाते हैं।

    और पढ़ें…

  • जल संग्रहण

    जल-संग्रहण पृथ्वी पर उपलब्ध जल का कुछ भाग पौधों, जन्तुओं तथा मनुष्य द्वारा प्रयुक्त होता है। जल का अधिकांश भाग समुद्री जल के रूप में होता है। जिसका सीधा उपयोग करना संभव नहीं है। वर्षा की कमी से भौम (भूमि) जल का स्तर अत्यधिक नीचे चला जाता है। जनसंख्या वृद्धि, वर्षा का असंतुलन, उद्योगों में […]

    और पढ़ें…

  • जल चक्र

    जल स्रोत से जल वाष्पीकरण द्वारा वाष्प के रूप में ऊपर उठता है। जल वाष्प के संघनन से बादल बनते हैं तथा वर्षण द्वारा जल वर्षा के रूप में पुनः जल स्रोतों में आता है। इस चक्र को जल चक्र कहते है। इन्हें भी देखें जल जल प्रदूषण

    और पढ़ें…

  • शैवाल ब्लूम

    वाहित मल, कृषि में प्रयुक्त उर्वरक एवं अन्य अपशिष्ट पदार्थों में नाइट्रेट एवं फास्फेट युक्त रसायन प्रचुर मात्रा में उपस्थित होते है। ये रसायन युक्त अपशिष्ट जलाशयों व तालाबों में मिल जाते है तो ये शैवालों के लिए पोषक का कार्य करते है। जिससे इन जलाशयों में शैवालों की वृद्धि तेजी से होती है। शैवालों […]

    और पढ़ें…