हनुमान


हनुमान जी की आरती

आरती कीजै हनुमान लला की – 2
दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।।
आरती कीजै हनुमान लला की – 2
जाके बल से गिरवर कांपे।
रोग दोष जाके निकट न झांके।।
अंजनिपुत्र महाबल दाई।
संतन के प्रभु सदा सुहाई।।
आरती कीजै हनुमान लला की – 2
दे बीरा रघुनाथ पठाये।
लंका जाये सिया सुधि लाए।।
लंका सो कोट समुद्र सी खाई।
जात पवनसुत बार न लाई।।
लंका जारी असुर सहारे।
सियाराम जी के काज संवारे।।
आरती कीजै हनुमान लला की – 2
लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे।
आनी सजीवन प्राण उबारे।।
पैठि पाताल तोरि यम कारे।
अहिरावण की भुजा उखारे।
बाएं भुजा असुर दल मारे।
दाहिने भुजा संत जन तारे।।
आरती कीजै हनुमान लला की – 2
सुर नर मुनि जन आरती उतारे।
जय जय जय हनुमान उचारे।।
कंचन थाल कपूर लौ छाई
आरती करत अंजना माई।
जो हनुमान जी की आरती गावे
बसहिं वैकुंठ परम पद पावे
आरती कीजै हनुमान लला की – 2
“भगवान श्री राम चंद्र की जय
सिया वर राम चंद्र की जय”


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