लोठूजी निठारवाल का जन्म 1804 ई. में राजस्थान के सीकर जिले के रींगस में हुआ था। ये एक क्रन्तिकारी समाज सुधारक थे। उन्होंने गुलामी की आदतन जनता में स्वाभिमान पैदा किया। उनका मत था कि अमीर एवं उच्च वर्ग कभी जनता व देश के स्वाभिमान का ध्यान नहीं रखते हैं। अंगरेजों की इज्जत को मिटटी में मिलाने वाले लोठू निठारवाल क्रांतिकारियों के प्रेरक बने, इस वजह से १८५७ की क्रांति के हीरो तात्या टोपे सीकर की धरती पर पधारे, लेकिन तब तक लोठू धरती माँ के लिए शहीद हो चुके थे। 1855 ई. में इनकी मृत्यु हो गई।